ॐ श्री जय हंस निर्वाण निरंजन नित्य





विचार करो की जीवन एक कला है और उस कला को हम अपनाते है, तो हमारी जीवन यात्रा सरल होती है।
विचारों का दरिया हमारे पास है, तो उसे बहने दो, बहेगा तो पता चलेगा कि उस दरिया के पानी की गहराई और बहाव कैसा है ? दरिया कि गति किस तरफ़ है आखिर ये दरिया सागर में जाकर मिलता है या नहीं।




                                                   सत् चित आनन्द रूप निज सवरूप 



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