जीवन एक विचार अनेक
ᛁᛁॐ श्री जय हंस निर्वाण निरंजन नित्यᛁᛁ
ၱၱၱၱၱၱၱၱၱၱၱၱ ဣဣဣဣဣဣဣဣဣဣဣဣ ဣဣဣဣဣဣဣဣဣဣဣဣ
किसी बात पर प्रतिकिया दी जाए, यह आवश्यक नहीं फिर भी मानव जीवन की कहानी एक विचित्र रहस्य है,इसे समझ का फेर कहे या कुछ और कहना आसन नहीं, इसलिए हम तो उसी बात को लेकर चर्चा करते हैं,जो हमारे अनुभव में आती हैᛁ जीवन एक है, पर इस जीवन में विचार अनेक हैंᛁ अत: किसी एक विचार पर ध्यान करना थोड़ा कठिन मालूम पड़ता है,अगर एक विचार भी पूरी तरह प्रकट हो तो निर्णय में आसानी रहती हैᛁ विचारों की अधिकता उलझन का ही नाम है, स्पष्ट विचार में उलझन का भला क्या काम है? एक से अनेक होना और अनेक से एक होना ही किसी का आरम्भ-मध्य और अंत है, यही बात विचारों पर लागू करे तो हम कह सकते है कि अंत भला तो सब भला ᛁ
ᝡ फिर चाहे आरम्भ और मध्य में कुछ भी चलता रहा हो ᝡ
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किसी बात पर प्रतिकिया दी जाए, यह आवश्यक नहीं फिर भी मानव जीवन की कहानी एक विचित्र रहस्य है,इसे समझ का फेर कहे या कुछ और कहना आसन नहीं, इसलिए हम तो उसी बात को लेकर चर्चा करते हैं,जो हमारे अनुभव में आती हैᛁ जीवन एक है, पर इस जीवन में विचार अनेक हैंᛁ अत: किसी एक विचार पर ध्यान करना थोड़ा कठिन मालूम पड़ता है,अगर एक विचार भी पूरी तरह प्रकट हो तो निर्णय में आसानी रहती हैᛁ विचारों की अधिकता उलझन का ही नाम है, स्पष्ट विचार में उलझन का भला क्या काम है? एक से अनेक होना और अनेक से एक होना ही किसी का आरम्भ-मध्य और अंत है, यही बात विचारों पर लागू करे तो हम कह सकते है कि अंत भला तो सब भला ᛁ
ᝡ फिर चाहे आरम्भ और मध्य में कुछ भी चलता रहा हो ᝡ
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