सोच विचार
आत्मा में गुरु और शिष्य
भाव नहीं है,सकल
आत्म ही हैं, गुरु आत्म,शिष्य आत्म कहियेᛁ
समाधी बुद्धि का विषय है
और चिदाभास ज्ञान का
विषय हैᛁ
भेऴा है पर भिलता नहीं– साथ होकर भी अलग
रहता हैᛁ
मानसरोवर हंसों का देश हैᛁ
सिमर्थ – सुमरणᛁ
संत संत सब एक हैं अर्थात संतो में भेद नहीं फिर
भी उनकी रचना में अंतर हो सकता है, जैसे -
पूर्ण संत सुमद्र की भांति है और अपूर्ण
संत तालाब हैᛁ
अत: दोनों की कार्य क्षमता में अंतर हैᛁ
देश दीवाना – उस
देश में रहने वाले दीवाने है न
की देश किसी का दीवाना हैᛁ
की देश किसी का दीवाना हैᛁ
जीवत मरना - जिस प्रकार मुर्दा राग- द्वेष से
रहित होता हैᛁ
रहित होता हैᛁ
(मुर्दे के पास कोई वस्तु रखे या
किसी के द्वारा
रखी हुई वस्तु को कोई उठा ले, तो मुर्दे को इससे
कोई फर्क नहीं पड़ता है, न तो वह देने वाले से प्रेम रखता है, न लेने वाले से द्वेष रखता हैᛁ )
रखी हुई वस्तु को कोई उठा ले, तो मुर्दे को इससे
कोई फर्क नहीं पड़ता है, न तो वह देने वाले से प्रेम रखता है, न लेने वाले से द्वेष रखता हैᛁ )
उसी प्रकार जो ज्ञानीजन का रहना है, उसे जीवत मरना कहा गया हैंᛁ

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