|| जीवन की समझ ही समस्या का समाधान है ||
जीवन में न
नकारात्मकता समाधान है, न सकारात्मकता
समाधान है, क्योंकि व्यक्ति न तो हरदम नकारात्मक सोच
रख सकता है और न ही हरदम सकारात्मक सोचता रहती
है, उसकी सोच में दोनों बातें चलती रहती हैं,
अत: सिर्फ जीवन
को समझ लेना ही समस्या का समाधान हैं|
समाधान है, क्योंकि व्यक्ति न तो हरदम नकारात्मक सोच
रख सकता है और न ही हरदम सकारात्मक सोचता रहती
है, उसकी सोच में दोनों बातें चलती रहती हैं,
अत: सिर्फ जीवन
को समझ लेना ही समस्या का समाधान हैं|
लाखो में कुछ लोगो का फैशन ही प्रोफैशन बन जाता है,
हमारे लिए इन दोनों के अर्थ में अंतर को समझना जरूरी
है|
हमारे लिए इन दोनों के अर्थ में अंतर को समझना जरूरी
है|
जो सहज स्वभाविक है, किसी प्रलोभन से नहीं जुड़ा है,
जिसको करने में आनन्द आता हैं, किसी अन्य की अपेक्षा
नही रहती, वो फैशन हो सकता है,
जिसको करने में आनन्द आता हैं, किसी अन्य की अपेक्षा
नही रहती, वो फैशन हो सकता है,
लकिन जो काम
किसी लाभ या अर्थ के लिए किया जाए व
प्रोफैशन ही हो सकता हैं, फैशन नहीं |
प्रोफैशन ही हो सकता हैं, फैशन नहीं |
प्रसिद्ध होने के लिए, नाम कमाने के लिए, दाम कमाने के
लिए, सुख साधन प्राप्त करने के लिए, जिद्द के लिए, बदले
के लिए, किसी प्रकार के प्रलोभन के लिए आदि उद्धेश्य को
लेकर किया जाने वाला काम फैशन नहीं प्रोफैशन ही हैं |
लिए, सुख साधन प्राप्त करने के लिए, जिद्द के लिए, बदले
के लिए, किसी प्रकार के प्रलोभन के लिए आदि उद्धेश्य को
लेकर किया जाने वाला काम फैशन नहीं प्रोफैशन ही हैं |
इसलिए पहले खुद को समझो,
फिर अपने आस पास के
वातावरण को समझो, उसके बाद अपने फैशन और प्रोफैशन
पर विचार करो |
वातावरण को समझो, उसके बाद अपने फैशन और प्रोफैशन
पर विचार करो |
क्या आप का फैशन प्रोफैशन हो सकता है ? या नहीं |
उत्तर आप को खुद ब खुद मिल जाएगा |
उत्तर आप को खुद ब खुद मिल जाएगा |
आप या तो दोनों को अलग रखेगें |
या फैशन को प्रोफैशन बनायेगें|
या प्रोफैशन के हिसाब से फैशन ही बदल दे |
या फिर आप अपने फैशन को पहले समझे नहीं थे |
अब समझ आया है,
तो अपने असली फैशन की पहचान के
बाद अपने फैशन को बदलने के साथ साथ उसे अपना
प्रोफैशन बना ले |
बाद अपने फैशन को बदलने के साथ साथ उसे अपना
प्रोफैशन बना ले |
यही जीवन की समझ है |
दूसरे की नक़ल करना और यह सोचना की वो कर सकता
है, तो मैं क्यों नहीं कर सकता हूँ,यह सरासर जीवन में
नासमझी है|
है, तो मैं क्यों नहीं कर सकता हूँ,यह सरासर जीवन में
नासमझी है|
जिस तरह गाने की कला से
जुड़ी गलत फहमियां है कि
हर कोई गा सकता है, पर ऐसा होता नही हैं, उसके
लिए सुर की समझ के साथ साथ गले का ध्वनियंत्र भी
उपयुक्त होना जरूरी है, तभी यह काम सफल और सही
होता है|
हर कोई गा सकता है, पर ऐसा होता नही हैं, उसके
लिए सुर की समझ के साथ साथ गले का ध्वनियंत्र भी
उपयुक्त होना जरूरी है, तभी यह काम सफल और सही
होता है|
अन्यथा अपूर्णता की गाँठ कभी खुलती ही नहीं और जब
फाइनल शो होता है,
फाइनल शो होता है,
कई हजारों के सामने गाना होता है, तो असलियत
खुदबखुद सामने आ जाती हैं|
खुदबखुद सामने आ जाती हैं|
असली दर्पण
वही हैं, जहाँ सब कुछ स्पष्ट हो जाता हैं |
उससे ही पता चलता हैं, कितना और क्या शेष रह गया?
इसके लिए अब क्या करना होगा? क्या करना सही है?
इसके लिए अब क्या करना होगा? क्या करना सही है?
यदि कोई गाने के जरिये टीवी
पर आना या दिखना चाहता
है, तो उसका फैशन गाना नही बल्कि प्रसिद्धी है|
है, तो उसका फैशन गाना नही बल्कि प्रसिद्धी है|
अत: पहले
खुद को टटोलकर कर देखना जरुरी है|
सोचो -
सोचो -
आप अकेले कही मंदिर में गाना गा रहे हैं और गाते ही जा
रहे हैं, क्या आप को अच्छा लग रहा हैं? क्या आप बोर
नहीं हो रहे हैं? अंदर से कुछ आ ही नही रहा तो क्या
गाऊं, यहाँ किसको प्रमाणित करके दिखाना है, मुझे कौन
देख रहा है? जो मेरा गाना जरुरी है अर्थात मेरी मर्जी है,
गाऊं या ना गाऊं, कोई जोर जबरदस्ती नही की गाना ही
पड़ेगा या मैं गाऊंगा तो मुझे कुछ मिलेगा इस तरह के
ख्याल बार बार आना क्या फैशन है? ये सब बाते फैशन
में नहीं होती हैं, फैशन का समय निर्धारित नही होता,
फैशन यह नही की मैं किसी काम को इतने सालो तक
करूंगा तो ये उन्नत होगा, इसका लेवल बढ़ेगा, बल्कि
फैशन तो वह है, जो जीवन में इस कदर समा जाए की
जीवन उसके साथ हो तो हम सहज और स्वभाविक आनन्द
की अनुभूति करे और ऐसा लगने लगे की जीवन ही गाना
हैं | इस प्रकार गाना जिसे आता है, तो फिर क्या कहना? उसका फैशन ही प्रोफेशन हैं|
fashion शब्द
फ़ैशन शब्द कई अर्थो में प्रयुक्त होता है
संज्ञा रूप में फैशन का अर्थ - भूषाचार, विधान, व्यवहार, चालू पोशाक, सभ्यसमाज, संप्रदाय, प्रकार, वेश-भूषा |
क्रिया रूप में फैशन - तराशना, आकार देना, निर्माण करना, विधान करना आदि |
यह संज्ञा शब्द के रूप में निम्नलिखित अर्थो में प्रयुक्त होता है-
व्यवसाय-business, profession, vocation, career, practice, industry.
व्यापार-business, trading, trade, merchandise, commerce, profession.
प्रतिज्ञा-pledge, promise, premise, profession, obligation, proposition.
नियुक्ति-appointment, employment, post, deputation, assignation, profession.
घोषणा-announcement, declaration, proclamation, promulgation, annunciation, profession.
स्वीकार-acceptance, assent, promise, profession.
धार्मिक संस्था-profession
संव्ययसाय-profession
वृत्ति-instinct, profession, batta, disposition, leaning, vritti


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